मेरी तरहाँ...

 🌷🌷🌷  मेरी तरहाँ  🌷🌷🌷

Meri,  tarhaa,  parinda
मेरी तरहाँ 

सपनों से जुदा तू भी हैं ना मेरी तरहाँ,
सच-सच बता गुमशुदा तू भी है ना मेरी तरहाँ । 

रखता क्यों है मायूसियाँ  हर वक़्त फूल से चेहरे पर,
 बेचैन चिंताओं से खामख्वाह तू भी है ना मेरी तरहाँ । 

नहीं देख सकता ना किसी की आँखों से छलकते आँसूं,
फितरत से खुदा तू भी है ना मेरी तरहाँ । 

वो लौट रहा मुसाफिर खाली हाथ तेरे दर से बता अब,
खुद से खफा तू भी है ना मेरी तरहाँ । 

बाहर क्यों ढूंढता है उसे जो अंदर ही मौजूद है तेरे,
गुमनाम फरिश्ता तू भी है ना मेरी तरहाँ । 

उड़ तो रहा आसमान में पर निगाहें जमीन पे रखता है,
भटका हुआ परिंदा तू भी है ना मेरी तरहाँ । 

वक़्त की हर करवट पे 'सुमीत' चाहता है सलामती तेरी,
मांगता रब से दुआ तू भी है ना मेरी तरहाँ । 


✍️ सुमीत सिवाल...
 

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