*** ख़ुदा ***
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| ख़ुदा |
समंदर में सियासी लहरें आख़िर उछालता क्यूँ है ?
मासूम कश्तियों को मेरे खुदा फिर संभालता क्यूँ है ?
पानी सा बहता हूँ..., तो जमा देता है पत्थर सा...
तो पत्थर दिल को मेरे ख़ुदा फिर पिंघालता क्यूँ है ?
✍️ सुमीत सिवाल...

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