क़लन्दर...

👣🧘‍♂️*** क़लन्दर ***🧘‍♂️👣

कलंदर
कलंदर 

गुम कब उनके पैरों के निशान होते हैं...
कलंदरों के क्या कभी पक्के मकान होते हैं ?

जिम्मेदारियाँ पड़ती हैं जिन के कांधों पे वक़्त से पहले...
वो बच्चे ज़रा बताओ कब जवान होते हैं ?

पूछता हूँ सब दोस्तों का हाल मिज़ाज़ देख के...
सारे पत्थर दिल लोग थोड़े ना बेज़ुबान होते हैं !

सुनो ये बातें मेरी चुपचाप दिल की निगाहों से...
पर ध्यान रहे यहाँ दीवारों के भी कान होते हैं !

मैं ख़ौफ़ज़दा हूँ तो देखो यहाँ लोग कितने ख़ुश हैं...
ज़ब मुस्कुराता हूँ तो न जाने क्यूँ हैरान होते हैं !

प्यास बुझाने को मीलों मील उड़कर चले जाते हैं...
मासूम परिंदो के पास कहाँ तीर कमान होते हैं !

नारी के अपमान ने यहाँ कई राजमहल श्मशान किये...
स्त्री-शक्ति को जहाँ पूजा जाए सच में वहाँ भगवान होते हैं !

वहाँ ज़न्नत बख्शता है ख़ुदा जहाँ दोस्त मिलकर रहते हैं...
और दोस्तों में जहाँ प्यार ना हो...सब वीरान होते हैं !

मजबूर लोगों का जमकर फ़ायदा उठता है यहाँ...
जान कर भी लोग इस गुनाह से अनजान होते हैं !

वो मज़ा जीत में कहाँ जो हार में आता है "सुमीत"...
हर बार जीतने वाले बादशाह कब महान होते हैं ?


✍️सुमीत सिवाल...



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