🌺 🦋 तितली 🦋🌺
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| तितली |
वो मुस्कुरा के दिल-ओ-जाँ पे वार करता है,
कि एक तीर से दो-दो शिकार करता है !
मैं उसको दोस्त समझने लगा मगर मुझको,
वो दुश्मनों में अभी तक शुमार करता है !
ख़याल में भी न आए जो मेरे दुश्मन के,
वो काम मेरे लिए मेरा यार करता है !
उस आदमी से तो हर वक़्त होशियार रहो,
जो दूसरों से तुम्हें होशियार करता है !
कुछ इस तरहॉं फूल से लिपटी थी तितली,
पता चला ना कौन किसे प्यार करता है ?
बस एक माँ ही मेरी राह देखे है वरना,
किसी का कौन यहाँ इंतज़ार करता है ?
तमाम लोगों से रहता है होशियार मगर,
वो 'अजनबी' पे बहुत एतबार करता है !
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