😴😌 ख़्वाब 😌😴
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| ख़्वाब |
लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं ?
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं ?
नींद से मेरा त'अल्लुक़ ही नहीं बरसों से...
ख्वाब आ आ के मेरी छत पे टहलते क्यों हैं ?
😌🙏😴

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