😌🍃🌊 रेत पर नाम 🌬️🌊😌
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| रेत पर नाम |
रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा ?
एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं
तुमने पत्थर सा दिल हमको कह तो दिया
पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं ।
मैं तो पतझर था फिर क्यूं निमंत्रण दिया ?
ऋतु बसंती को तन पर लपेटे हुए
आस मन में लिए प्यास तन में लिए
कब शरद आई पल्लू समेटे हुए ?
तुमने फेरीं निगाहें अंधेरा हुआ
ऐसा लगा है सूरज उगेगा नहीं।
मैं तो होली मना लूंगा सच मानिए
तुम दिवाली बनोगी ये आभास दो
मैं तुम्हें सौंप दूंगा तुम्हारी धरा
तुम मुझे मेरे पंखों का आकाश दो
उंगलियों पर दुपट्टा लपेटो न तुम
यूं करोगे तो दिल चुप रहेगा नहीं ।
आंख खोली तो तुम रुक्मिणी सी लगी
बंद की आंख तो राधिका तुम लगी
जब भी सोचा तुम्हें शांत एकांत में
मीराबाई सी एक साधिका तुम लगी
कृष्ण की बांसुरी पर भरोसा रखो
मन कहीं भी रहे पर डिगेगा नहीं ।
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