*** एकांत ***
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| एकांत (solitude) |
एकांत
— एला व्हीलर विलकॉक्स (1850–1919)
(हिंदी अनुवाद)
हँसो, तो दुनिया भी हँसेगी;
रोओ, तो अकेले रोओगे;
इस दुखी पुरानी धरती को भी हँसी उधार लेनी पड़ती है,
पर दुख इसके पास पहले ही बहुत हैं।
गाओ, तो पहाड़ भी गूंज उठते हैं;
आह भरो, तो हवा में खो जाती है;
प्रतिध्वनि बस प्रसन्न स्वर को लौटाती है,
दुख की आवाज़ से वो कतराती है।
खुश रहो, तो लोग तुम्हारे पास आएंगे;
शोक मनाओ, तो सब मुंह मोड़ लेंगे;
उन्हें चाहिए तुम्हारी खुशियों का भरपूर हिस्सा,
पर तुम्हारे दुःख की उन्हें कोई ज़रूरत नहीं।
प्रसन्न रहो, तो दोस्त कई होंगे;
दुखी रहो, तो सब दूर हो जाएंगे
मधुर मदिरा सबको चाहिए,
पर जीवन का कड़वा प्याला तुम्हें अकेले पीना होगा।
जश्न मनाओ, तो महफिल भरी होगी;
उपवास करो, तो दुनिया अनदेखा कर देगी।
सफल हो जाओ और दान दो, तो जीवन में सहारा मिलेगा,
पर कोई नहीं है जो तुम्हारे लिए मृत्यु को आसान बना सके।
सुख की महलों में जगह है,
एक बड़े और भव्य जुलूस के लिए,
पर अंततः हमें सबको अकेले गुजरना होता है...
पीड़ा की उस संकरी गलियों से।
🙏🙋♂️🧘🕊️🌱🌳🛖🙏😌


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