✍️*** क़लम ***✒️क़लम 🖋️ क़लम जैसे क़दम-क़दम चलती गई , हमारी ज़िंदगी भी लम्हा-लम्हा बदलती गई , जो ख्वाहिशें ख्वाबों में पाली थी हमने कभी... वो धीमे-धीमे सांचों में ढलती गई। ✍️सुमीत सिवाल...
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